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Sunday, 1 February 2026

होर्मुझ strait मे इराण की हरकत क्या मायना लगती है विश्लेषण

...होर्मुज स्ट्रेट में हलचल बढ़ी है, ईरान-चीन-रूस की लाइव फायर ड्रिल के क्या मायने हैं?

 

होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में हालिया सैन्य गतिविधियां और ईरान, चीन रूस की 'लाइव फायर ड्रिल' वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था के लिहाज से अत्यंत संवेदनशील हैं। आज (1 फरवरी, 2026) से शुरू हुआ यह अभ्यास केवल सैन्य शक्ति का प्रदर्शन है, बल्कि एक गहरा कूटनीतिक संदेश भी है।

इसके प्रमुख मायने और प्रभाव नीचे दिए गए हैं:

1. पश्चिमी देशों को सामूहिक चुनौती

यह ड्रिल स्पष्ट रूप से अमेरिका और उसके सहयोगियों (NATO) को यह संदेश देने के लिए है कि मध्य पूर्व (Middle East) में अब केवल पश्चिमी शक्तियों का दबदबा नहीं है। चीन, रूस और ईरान का यह 'त्रिपक्षीय गठबंधन' एक वैकल्पिक सुरक्षा ब्लॉक के रूप में उभर रहा है, जो अमेरिकी नौसैनिक उपस्थिति को संतुलित करने की कोशिश कर रहा है।

2. ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक अर्थव्यवस्था

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण 'ऑयल चोकपॉइंट' है।

  • दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 20% और LNG का बड़ा हिस्सा इसी संकीर्ण मार्ग से गुजरता है।
  • लाइव फायर ड्रिल के कारण अगर इस मार्ग में थोड़ी भी बाधा आती है, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें $120 प्रति बैरल के पार जा सकती हैं।

3. रणनीतिक और तकनीकी सहयोग

इस अभ्यास में केवल पुराने जहाज शामिल नहीं हैं, बल्कि आधुनिक तकनीक का भी परीक्षण हो रहा है:

  • इंटरऑपरेबिलिटी: तीनों देशों की नौसेनाओं के बीच तालमेल बढ़ाना।
  • हाइब्रिड हथियार: ईरान द्वारा अपनी नई 'घोस्ट बोट' (स्टील्थ टॉरपीडो बोट) और अत्याधुनिक ड्रोन्स का प्रदर्शन।
  • GPS जैमिंग: रिपोर्टों के अनुसार, ड्रिल के दौरान इलेक्ट्रॉनिक युद्ध (Electronic Warfare) के युद्धाभ्यास भी किए गए हैं ताकि दुश्मन की मिसाइलों को दिशाहीन किया जा सके।

4. इजरायल-ईरान तनाव का संदर्भ

हाल के महीनों में इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव के बीच यह ड्रिल ईरान के लिए एक 'सुरक्षा कवच' की तरह है। रूस और चीन के साथ अभ्यास करके ईरान यह जताना चाहता है कि वह क्षेत्र में अकेला नहीं है और किसी भी संभावित हमले की स्थिति में उसे बड़े देशों का समर्थन प्राप्त है।


मुख्य आंकड़े एक नजर में:

विशेषता

विवरण

महत्व

दुनिया का 1/5 तेल यहीं से गुजरता है।

संकीर्णता

सबसे कम चौड़ाई केवल 33 किमी (21 मील) है।

उद्देश्य

समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी अभियान और पश्चिमी प्रभाव को कम करना।

निष्कर्ष: यह हलचल केवल एक अभ्यास नहीं, बल्कि एक 'भू-राजनीतिक बिसात' है। जहाँ रूस अपनी खोई हुई वैश्विक प्रतिष्ठा बहाल करना चाहता है, वहीं चीन अपनी ऊर्जा आपूर्ति लाइनों को सुरक्षित कर रहा है और ईरान प्रतिबंधों के बावजूद अपनी ताकत दिखा रहा है।

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