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Sunday, 8 February 2026

ईरान की मिसाइल पावर के बारे में दुनिया जानती है...ईरान की मिसाइलें अमेरिका के लिए खतरा बन सकती हैं...क्या इसी से अमेरिका भी थोड़ा परेशान है,. अमेरिका के डिफेंस सिस्टम को भी ईरान की मिसाइलें भेद सकती हैं...ये दावा ईरान ने किया है। क्या ये संभव है

 

2. 

ईरान की मिसाइल शक्ति को अमेरिका बहुत गंभीर तरीके से लेता है, लेकिन यह उसकी सैन्य क्षमता कोपरेशानकरने से ज़्यादाउसे कंट्रोल डिटर करने की रणनीतिक चुनौती है।

क्यों ईरान की मिसाइलें असली खतरा हैं?

  • ईरान के पास मध्यपूर्व का सबसे बड़ा बैलिस्टिक मिसाइल आर्सेनल माना जाता हैशॉर्टरेंज रॉकेट से लेकर 2,000 किमी तक मार करने वाली मध्यमदूरी की मिसाइलें, क्रूज़ मिसाइलें और यूएवी सिस्टम तक।
  • 2020 में ईरान ने इराक़ के अइन अलअसद जैसे बेस पर सैकड़ों किमी दूर से प्रिसिजन मिसाइल स्ट्राइक कर यह दिखा दिया कि वह अमेरिकी ठिकानों को सटीकता से हिट कर सकता है, भले ही अमेरिकी एयर डिफेन्स ने कुछ क्षति सीमित कर दी हो।
  • हाल के वर्षों में उसने नए सॉलिडफ्यूल, मैन्युवरेबल रीएंट्री व्हीकल वाले मिसाइल और लंबी दूरी के क्रूज़/एंटीशिप सिस्टम विकसित किये हैं, जो खाड़ी के अमेरिकी बेस, गैसऑयल इन्फ्रास्ट्रक्चर और स्ट्रेट ऑफ होरमुज़ में जहाज़ों को निशाना बना सकते हैं।

अमेरिकी मूल्यांकन क्या कहता है?

  • यूएस सेंट्रल कमांड की आधिकारिक रणनीति ईरान को अपने एरिया मेंसबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रीय खतराबताती है और साफ़ कहती है कि उसकी बैलिस्टिक मिसाइल यूएएस (ड्रोन) क्षमता अमेरिकी फोर्सेज और पार्टनर देशों के लिए मुख्य चिंता है।
  • CSIS जैसी थिंकटैंकों की नेटअसेसमेंट रिपोर्टें मानती हैं कि ईरान प्रिसिजन स्ट्राइक में काफ़ी आगे बढ़ चुका है और खाड़ी क्षेत्र में मिसाइलडिफेन्स नेटवर्क को सैचुरेट या बायपास करने की क्षमता धीरेधीरे बढ़ा रहा है।
  • विश्लेषण यह भी मानता है कि ईरान केवल अपने मिसाइलों से नहीं, बल्कि हिज़्बुल्लाह, हूथी, इराक़ी मिलिशिया जैसे प्रॉक्सी को मिसाइल/ड्रोन देकर भी अमेरिकी ठिकानों, जहाज़ों और सहयोगियों पर दबाव बना सकता है।

परेशानीकिस रूप में है?

  • अमेरिका पारंपरिक युद्ध में ईरान से कहीं ज़्यादा ताक़तवर है; पर ईरान की मिसाइलें किसी भी सीधे युद्ध की कीमत बहुत महँगी कर देती हैं – खाड़ी के बेस, एयरफील्ड, पोर्ट, ऑयलइन्फ्रा और क्षेत्रीय सहयोगी पहले 24–48 घंटे में भारी नुकसान झेल सकते हैं।
  • इसी वजह से अमेरिकी प्लानिंग में अब ज़्यादा ज़ोर मिसाइलडिफेन्स, बेसहार्डनिंग, डिस्पर्सल, मोबाइल एसेट्स और डिटरेंस पर है, कि केवल एयरस्ट्राइक पर; यानी वॉशिंगटन ईरान की मिसाइल क्षमता कोरीयल, हाईकास्ट थ्रेटमानता है।

निचोड़

  • हाँ, ईरान की मिसाइल पावर को लेकर अमेरिकाथोड़ानहीं, बल्कि गंभीर रूप से सजग और चिंतित है, क्योंकि यह उसकी सेनाओं, ठिकानों और सहयोगियों के लिए ठोस जोखिम पैदा करती है।
  • लेकिन यह चिंता उसके सैन्य संतुलन को उलटने वाली नहीं है; अमेरिका के पास अभी भी जबरदस्त जवाबीहमला, मिसाइलडिफेन्स और एलायंस पावर है, इसलिए दोनों पक्ष मिसाइलों का ज़्यादातर उपयोग डिटरेंस और प्रोपेगेंडा के लिए कर रहे हैं, कि खुले युद्ध के लिए।

 

 

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ईरान का दावा कि उसकी मिसाइलें अमेरिकी डिफेंस सिस्टम (Patriot, THAAD, Aegis आदि) कोआरपारभेद देंगीआंशिक रूप से संभव, लेकिन पूरी तरह भरोसेमंद नहीं हैयह तकनीकी क्षमता + प्रोपेगेंडा दोनों का मिश्रण है।

1. तकनीकी रूप से क्या संभव है?

  • ईरान ने हाल के वर्षों में कई ऐसे बैलिस्टिक क्रूज़ मिसाइलों का परीक्षण किया है जिनके बारे में वह कहता है कि वे THAAD और Patriot जैसे सिस्टम को भेद सकते हैं; उदाहरण के लिए एक 1,200 किमी रेंज वाली मिसाइल जिसकी मारक क्षमता और मैन्युवरेबल वारहेड पर ज़ोर दिया गया।
  • 2020 में अइन अलअसद बेस पर हमले में ईरानी मिसाइलों ने बिना इंटरसेप्शन के सीधे लक्ष्य पर वार किया, जिससे यह सिद्ध हुआ कि उनकी सटीकता 50 मीटर CEP से बेहतर हो चुकी है और वे असुरक्षित ठिकानों पर भारी नुकसान पहुँचा सकती हैं।

इससे साबित होता है कि अगर किसी अमेरिकी या सहयोगी बेस पर पर्याप्त एयरडिफेंस हो, या मिसाइलें अचानक/एक साथ बड़ी संख्या में छोड़ी जाएँ, तो कुछ मिसाइलें डिफेंस को चकमा देकर अंदर तक जा सकती हैं

2. लेकिनडिफेंस भेद देनाइतना आसान भी नहीं

  • THAAD, Patriot PAC‑3, Aegis आदि एक मल्टीलेयर नेटवर्क बनाते हैं; इनकी इंटरसेप्शन क्षमता, रडार और हिटटूकिल टेक्नॉलजी वास्तविक युद्धों (जैसे हूथी/ईरानी मिसाइलों के खिलाफ खाड़ी में) में काफ़ी हद तक सिद्ध हो चुकी है।​​
  • CSIS अन्य विश्लेषण मानते हैं कि अमेरिकीनेतृत्व वाला मिसाइलडिफेंस नेटवर्क परफेक्ट नहीं है, पर यह ईरान जैसे विरोधियों की योजनाओं को जटिल बनाता है और कई मिसाइलों को रास्ते में ही गिरा सकता है, खासकर अगर सल्वो बहुत बड़ा हो।
  • अइन अलअसद पर 2020 के हमले में मिसाइलें इसलिए नहीं रोकी गईं क्योंकि वहाँ उस समय इंटरसेप्टर तैनात ही नहीं थे; जहाँ THAAD/Patriot लगे होते हैं, वहाँ इंटरसेप्शन रेट कहीं बेहतर रहता है।

3. ईरान के दावे की वास्तविकता

  • ईरान के रक्षा मंत्री और मीडिया यह कहते हैं कि उनकी नई मिसाइलें THAAD‑Patriot जैसीसबसे आधुनिक रक्षा प्रणाली को भेद सकती हैं” – यह बयान डिटरेंस प्रोपेगेंडा के लिए है, कि किसी सार्वजनिक, स्वतंत्र टेस्ट डाटा पर आधारित।
  • अमेरिकी और स्वतंत्र विश्लेषकों का निष्कर्ष है:
    • अगर ईरान बहुतसी मिसाइलें, ड्रोन और क्रूज़ मिसाइलें एक साथ छोड़े, तो कुछ वॉरहेड रक्षा कवच से निकलकर अंदर जा सकते हैंयानी सिस्टम 100% सुरक्षित नहीं है।
    • लेकिन यह कहना किहमारी मिसाइलें आसानी से और नियमित रूप से अमेरिकी डिफेंस को भेद देंगी” अतिशयोक्ति है; रिज़ल्ट मिसाइल के प्रकार, संख्या, एंगल, डिफेंस लेयरिंग, पहले से अलर्ट लेवल आदि पर निर्भर करेगा।

4. नतीजादावा कहाँ तक सही?

  • संभव है:
    • सीमित या बिना डिफेंस वाले बेस, या ओवरलोडेड सिस्टम के खिलाफ, ईरानी मिसाइलें अमेरिकी/साझेदार ठिकानों को मार कर सकती हैं; 2020 का अनुभव इस खतरे को साबित कर चुका है।
  • पूरी तरह सही नहीं:
    • अच्छी तरह लेयर्ड THAAD–Patriot–Aegis नेटवर्क को लगातारभेदते रहनाअभी केवल ईरानी बयानबाज़ी है; मिसाइलडिफेंस की अपनी कमज़ोरियाँ हैं, पर वे ईरान के लिए भी बड़ी अनिश्चितता रिस्क पैदा करती हैं।

इसलिए, ईरान की मिसाइलें अमेरिकी डिफेंस के लिए वास्तविक और गंभीर चुनौती तो हैं, लेकिन उन्हें हर बारआसानी से भेदनेकी बात ज़्यादातर मनोवैज्ञानिक दबाव और घरेलूराजनीतिक प्रोपेगेंडा है, कि सिद्ध सैन्य तथ्य।