2.
ईरान की मिसाइल शक्ति को अमेरिका बहुत गंभीर तरीके से लेता है, लेकिन यह उसकी सैन्य क्षमता को “परेशान” करने से ज़्यादा – उसे कंट्रोल व डिटर करने की रणनीतिक चुनौती है।
क्यों ईरान की मिसाइलें असली खतरा हैं?
- ईरान के पास मध्य‑पूर्व का सबसे बड़ा बैलिस्टिक मिसाइल आर्सेनल माना जाता है – शॉर्ट‑रेंज रॉकेट से लेकर 2,000
किमी तक मार करने वाली मध्यम‑दूरी की मिसाइलें, क्रूज़ मिसाइलें और यूएवी सिस्टम तक।
- 2020 में ईरान ने इराक़ के अइन अल‑असद जैसे बेस पर सैकड़ों किमी दूर से प्रिसिजन मिसाइल स्ट्राइक कर यह दिखा दिया कि वह अमेरिकी ठिकानों को सटीकता से हिट कर सकता है, भले ही अमेरिकी एयर डिफेन्स ने कुछ क्षति सीमित कर दी हो।
- हाल के वर्षों में उसने नए सॉलिड‑फ्यूल, मैन्युवरेबल री‑एंट्री व्हीकल वाले मिसाइल और लंबी दूरी के क्रूज़/एंटी‑शिप सिस्टम विकसित किये हैं, जो खाड़ी के अमेरिकी बेस, गैस‑ऑयल इन्फ्रास्ट्रक्चर और स्ट्रेट ऑफ होरमुज़ में जहाज़ों को निशाना बना सकते हैं।
अमेरिकी मूल्यांकन क्या कहता है?
- यूएस सेंट्रल कमांड की आधिकारिक रणनीति ईरान को अपने एरिया में “सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रीय खतरा” बताती है और साफ़ कहती है कि उसकी बैलिस्टिक मिसाइल व यूएएस (ड्रोन) क्षमता अमेरिकी फोर्सेज और पार्टनर देशों के लिए मुख्य चिंता है।
- CSIS जैसी थिंक‑टैंकों की नेट‑असेसमेंट रिपोर्टें मानती हैं कि ईरान प्रिसिजन स्ट्राइक में काफ़ी आगे बढ़ चुका है और खाड़ी क्षेत्र में मिसाइल‑डिफेन्स नेटवर्क को सैचुरेट या बायपास करने की क्षमता धीरे‑धीरे बढ़ा रहा है।
- विश्लेषण यह भी मानता है कि ईरान केवल अपने मिसाइलों से नहीं, बल्कि हिज़्बुल्लाह, हूथी, इराक़ी मिलिशिया जैसे प्रॉक्सी को मिसाइल/ड्रोन देकर भी अमेरिकी ठिकानों, जहाज़ों और सहयोगियों पर दबाव बना सकता है।
“परेशानी” किस रूप में है?
- अमेरिका पारंपरिक युद्ध में ईरान से कहीं ज़्यादा ताक़तवर है; पर ईरान की मिसाइलें किसी भी सीधे युद्ध की कीमत बहुत महँगी कर देती हैं –
खाड़ी के बेस, एयरफील्ड, पोर्ट, ऑयल‑इन्फ्रा और क्षेत्रीय सहयोगी पहले 24–48
घंटे में भारी नुकसान झेल सकते हैं।
- इसी वजह से अमेरिकी प्लानिंग में अब ज़्यादा ज़ोर मिसाइल‑डिफेन्स, बेस‑हार्डनिंग, डिस्पर्सल, मोबाइल एसेट्स और डिटरेंस पर है, न कि केवल एयर‑स्ट्राइक पर; यानी वॉशिंगटन ईरान की मिसाइल क्षमता को “रीयल, हाई‑कास्ट थ्रेट” मानता है।
निचोड़
- हाँ, ईरान की मिसाइल पावर को लेकर अमेरिका “थोड़ा” नहीं, बल्कि गंभीर रूप से सजग और चिंतित है, क्योंकि यह उसकी सेनाओं, ठिकानों और सहयोगियों के लिए ठोस जोखिम पैदा करती है।
- लेकिन यह चिंता उसके सैन्य संतुलन को उलटने वाली नहीं है; अमेरिका के पास अभी भी जबरदस्त जवाबी‑हमला, मिसाइल‑डिफेन्स और एलायंस पावर है, इसलिए दोनों पक्ष मिसाइलों का ज़्यादातर उपयोग डिटरेंस और प्रोपेगेंडा के लिए कर रहे हैं, न कि खुले युद्ध के लिए।
3
ईरान
का दावा
कि उसकी
मिसाइलें अमेरिकी
डिफेंस सिस्टम
(Patriot, THAAD, Aegis आदि)
को “आर‑पार”
भेद देंगी, आंशिक
रूप से
संभव, लेकिन
पूरी तरह
भरोसेमंद नहीं
है – यह
तकनीकी क्षमता
+ प्रोपेगेंडा दोनों
का मिश्रण
है।
1. तकनीकी
रूप से क्या संभव है?
- ईरान ने हाल के वर्षों में कई ऐसे बैलिस्टिक व क्रूज़ मिसाइलों का परीक्षण किया है जिनके बारे में वह कहता है कि वे THAAD
और Patriot जैसे सिस्टम को भेद सकते हैं; उदाहरण के लिए एक 1,200
किमी रेंज वाली मिसाइल जिसकी मारक क्षमता और मैन्युवरेबल वारहेड पर ज़ोर दिया गया।
- 2020 में अइन अल‑असद बेस पर हमले में ईरानी मिसाइलों ने बिना इंटरसेप्शन के सीधे लक्ष्य पर वार किया, जिससे यह सिद्ध हुआ कि उनकी सटीकता 50 मीटर CEP से बेहतर हो चुकी है और वे असुरक्षित ठिकानों पर भारी नुकसान पहुँचा सकती हैं।
इससे
साबित होता
है कि
अगर किसी
अमेरिकी या
सहयोगी बेस
पर पर्याप्त
एयर‑डिफेंस
न हो,
या मिसाइलें
अचानक/एक
साथ बड़ी
संख्या में
छोड़ी जाएँ,
तो कुछ
मिसाइलें डिफेंस
को चकमा
देकर अंदर
तक जा
सकती हैं।
2. लेकिन
“डिफेंस भेद देना” इतना आसान भी नहीं
- THAAD, Patriot PAC‑3, Aegis आदि एक मल्टी‑लेयर नेटवर्क बनाते हैं; इनकी इंटरसेप्शन क्षमता, रडार और हिट‑टू‑किल टेक्नॉलजी वास्तविक युद्धों (जैसे हूथी/ईरानी मिसाइलों के खिलाफ खाड़ी में) में काफ़ी हद तक सिद्ध हो चुकी है।
- CSIS व अन्य विश्लेषण मानते हैं कि अमेरिकी‑नेतृत्व वाला मिसाइल‑डिफेंस नेटवर्क परफेक्ट नहीं है, पर यह ईरान जैसे विरोधियों की योजनाओं को जटिल बनाता है और कई मिसाइलों को रास्ते में ही गिरा सकता है, खासकर अगर सल्वो बहुत बड़ा न हो।
- अइन अल‑असद पर 2020 के हमले में मिसाइलें इसलिए नहीं रोकी गईं क्योंकि वहाँ उस समय इंटरसेप्टर तैनात ही नहीं थे; जहाँ
THAAD/Patriot लगे होते हैं, वहाँ इंटरसेप्शन रेट कहीं बेहतर रहता है।
3. ईरान
के दावे की वास्तविकता
- ईरान के रक्षा मंत्री और मीडिया यह कहते हैं कि उनकी नई मिसाइलें THAAD‑Patriot
जैसी “सबसे आधुनिक रक्षा प्रणाली को भेद सकती हैं” – यह बयान डिटरेंस व प्रोपेगेंडा के लिए है, न कि किसी सार्वजनिक, स्वतंत्र टेस्ट डाटा पर आधारित।
- अमेरिकी और स्वतंत्र विश्लेषकों का निष्कर्ष है:
- अगर ईरान बहुत‑सी मिसाइलें, ड्रोन और क्रूज़ मिसाइलें एक साथ छोड़े, तो कुछ वॉरहेड रक्षा कवच से निकलकर अंदर जा सकते हैं – यानी सिस्टम 100%
सुरक्षित नहीं है।
- लेकिन यह कहना कि “हमारी मिसाइलें आसानी से और नियमित रूप से अमेरिकी डिफेंस को भेद देंगी” अतिशयोक्ति है; रिज़ल्ट मिसाइल के प्रकार, संख्या, एंगल, डिफेंस लेयरिंग, पहले से अलर्ट लेवल आदि पर निर्भर करेगा।
4. नतीजा
– दावा कहाँ तक सही?
- संभव है:
- सीमित या बिना डिफेंस वाले बेस, या ओवरलोडेड सिस्टम के खिलाफ, ईरानी मिसाइलें अमेरिकी/साझेदार ठिकानों को मार कर सकती हैं;
2020 का अनुभव इस खतरे को साबित कर चुका है।
- पूरी तरह सही नहीं:
- अच्छी तरह लेयर्ड
THAAD–Patriot–Aegis नेटवर्क को लगातार “भेदते रहना” अभी केवल ईरानी बयानबाज़ी है; मिसाइल‑डिफेंस की अपनी कमज़ोरियाँ हैं, पर वे ईरान के लिए भी बड़ी अनिश्चितता व रिस्क पैदा करती हैं।
इसलिए,
ईरान की
मिसाइलें अमेरिकी
डिफेंस के
लिए वास्तविक
और गंभीर
चुनौती तो
हैं, लेकिन
उन्हें हर
बार “आसानी
से भेदने”
की बात
ज़्यादातर मनोवैज्ञानिक
दबाव और
घरेलू‑राजनीतिक
प्रोपेगेंडा है,
न कि
सिद्ध सैन्य
तथ्य।