भारत की सैन्य ताकत जिस गति से बढ़ रही है, उसने पाकिस्तान और चीन दोनों की सैन्य‑रणनीतिक गणनाएँ उलट दी हैं; वे खुलेआम चिंता जताते हैं और अपनी क्षमताएँ बढ़ाकर इसका जवाब देने की कोशिश कर रहे हैं।
सैन्य आधुनिकीकरण की तस्वीर
- भारत ने लगातार 5–6 साल से रक्षा बजट में आधुनिकीकरण
(capital outlay) का हिस्सा बढ़ाकर 2026 में 2.1 लाख करोड़ रुपये से ऊपर कर दिया है, जो वायु, थल और नौसेना तीनों की नई क्षमताओं पर खर्च हो रहा है।
- फोकस “संख्या” से हटकर “क्वालिटी” और मल्टी‑डोमेन कैपेबिलिटी पर है—लॉन्ग‑रेंज प्रिसिजन स्ट्राइक, नेटवर्क‑सेंट्रिक वॉरफेयर, एयर‑डिफेंस, स्पेस और साइबर जैसे क्षेत्रों में तेज प्रगति दिख रही है।
नई हथियार क्षमताएँ: पाकिस्तान‑चीन के लिए संदेश
- इजरायल के साथ SPICE‑1000,
Rampage, Air‑LORA और Ice Breaker जैसी लॉन्ग‑रेंज स्टैंड‑ऑफ मिसाइलों के 8.6–8.7
अरब डॉलर के पैकेज से IAF
300–400+ km दूर से दुश्मन के एयरबेस, SAM साइट और कमांड नोड्स को निशाना बना सकेगी।
- फ्रांस के साथ
HAMMER प्रिसिजन‑गाइडेड वेपन की जॉइंट मैन्युफैक्चरिंग (BEL‑Safran
JV) और Rafale/Tejas पर इसकी इंटीग्रेशन ने IAF को mid‑range,
हाई‑प्रिसिजन
surgical strike क्षमता दी है, जैसा ऑपरेशन सिंदूर में दिखा।
- स्वदेशी S‑400
स्तर की एयर‑डिफेंस, काउंटर‑ड्रोन और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम्स ने 2025 में पाकिस्तान के ड्रोन/मिसाइल हमलों को लगभग पूरी तरह विफल किया, जिससे दुश्मन की
strike credibility पर सीधा असर पड़ा।
इन क्षमताओं का कॉम्बिनेशन पाकिस्तान के लिए
conventional बैटल‑स्पेस को अत्यंत खतरनाक और चीन के लिए LAC/IOR दोनों थिएटर में ज्यादा जटिल बना देता है।
पाकिस्तान की चिंता और प्रतिक्रियाएँ
- पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था और रक्षा बजट भारत की तुलना में बहुत कमजोर हैं; इसके बावजूद वह J‑10C,
JF‑17 Block‑III और चीन से J‑31 स्टील्थ फाइटर लेने की कोशिश कर रहा है, ताकि IAF की
qualitative बढ़त का कुछ संतुलन कर सके।
- भारतीय एयर‑डिफेंस और प्रिसिजन‑स्ट्राइक क्षमता के कारण पाकिस्तान को डर है कि उसके एयरबेस, कमांड सेंटर्स और आतंकी‑इन्फ्रास्ट्रक्चर पर पहली ही लहर में
decisive नुकसान पहुँचाया जा सकता है, जैसा
Balakot और बाद में Operation Sindoor के पैटर्न से संकेत मिलता है।
इसलिए पाकिस्तान अब और ज्यादा चीन पर निर्भर हो रहा है—मिसाइल, एयर‑डिफेंस, नौसेना और साइबर क्षेत्रों में—लेकिन संसाधन‑सीमा के कारण यह “catch‑up” अधूरा ही रहता है।
चीन की रणनीतिक परेशानी
- PLA की कुल ताकत अभी भी भारत से बड़े पैमाने पर आगे है, लेकिन भारत की क्वालिटेटिव जंप—लॉन्ग‑रेंज प्रिसिजन स्ट्राइक, IOR में नौसैनिक तैनाती, मल्टी‑लेयर एअर‑डिफेंस और क्वाड/इंडो‑पैसिफिक पार्टनरशिप—चीन के लिए “द्विमुखी फ्रंट” की चिंता बढ़ा रही है।
- चीन की नई सैन्य रणनीति high‑intensity,
multi‑domain conflict और long‑range precision strike पर आधारित है; भारत का जवाब भी उसी दिशा में जा रहा है, जिससे LAC पर भविष्य के टकराव केवल “स्थानीय” नहीं रहेंगे, बल्कि कम्युनिकेशन नेटवर्क, लॉजिस्टिक्स और स्पेस‑assets
तक फैल सकते हैं।
चीन को डर है कि मजबूत और सुसज्जित भारतीय सेना, अमेरिका‑फ्रांस‑जापान जैसे देशों के साथ मिलकर हिंद‑प्रशांत में उसकी sea‑lines और critical
chokepoints पर दबाव बना सकती है।
रणनीतिक संतुलन पर प्रभाव
- भारत की बढ़ती ताकत से दक्षिण एशिया में “एकतरफा” सैन्य लाभ धीरे‑धीरे भारत की ओर झुक रहा है, खासकर
conventional और maritime डोमेन में; यह पाकिस्तान और चीन दोनों को अपनी योजनाओं में ज्यादा सावधान और
defensive बनाता है।
- साथ ही, विश्लेषण यह भी दिखाते हैं कि चीन की कुल सैन्य‑औद्योगिक क्षमता अब भी बहुत आगे है, इसलिए भारत के लिए लक्ष्य “डिटरेंस” और “escalation
control” को मजबूत करना है, न कि फुल‑स्पेक्ट्रम
parity हासिल करना।
निष्कर्षतः, भारत की तेज आधुनिकीकरण गति, लॉन्ग‑रेंज प्रिसिजन वेपन, स्वदेशी रक्षा उद्योग और बहुपक्षीय साझेदारियाँ मिलकर ऐसा सैन्य‑रणनीतिक माहौल बना रही हैं कि पाकिस्तान व चीन दोनों को अपने हर कदम का हिसाब कई बार लगाना पड़ रहा है—यही उनकी वास्तविक “घबराहट” की वजह है।
भारत‑पाक‑चीन संदर्भ में निहितार्थ
·
पाकिस्तान:
Air‑LORA और Rampage के
आने से
PAF के forward एयरबेस,
missile storage, और critical
C2 nodes 300–400+ km स्टैंड‑ऑफ
से vulnerable हो
जाएंगे; IAF को
pre‑emptive या counter‑force विकल्प
ज्यादा credible मिलेंगे।
·
चीन:
LAC के पीछे
की logistics arteries, high‑altitude
airstrips, और SAM/राडार
साइट्स पर
high‑precision standoff strike का विकल्प
खुलेगा, भले
ही PLA के
A2/AD बबल काफी
dense हों।
·
Deterrence: इतनी
लंबी दूरी
और प्रिसिजन
के साथ
conventionally “strategic‑effect” पैदा
करने वाली
capability, एस्केलेशन ladder पर
higher rungs पर credible
deterrent देती है,
बिना तुरंत
nuclear threshold छुए।
संक्षेप
में, SPICE‑1000, Rampage, Air‑LORA और
Ice Breaker मिलकर भारतीय
वायुसेना को
एक high‑end, नेटवर्क‑सेंट्रिक,
long‑range precision strike force की दिशा
में शिफ्ट
करते हैं,
जो भविष्य
के India–Pakistan–China कॉन्फ्लिक्ट
परिदृश्यों में
शुरुआती 72 घंटों
के एयर‑कैंपेन
की पूरी
तस्वीर बदल
सकते हैं
भारत‑पाक‑चीन परिप्रेक्ष्य में निहितार्थ
·
पाकिस्तान
के संदर्भ
में: HAMMER जैसा
स्टैंड‑ऑफ
PGM IAF को LoC/IB क्रॉस
किए बिना
या बहुत
कम समय
के लिए
enemy air‑defence envelope में
गए बगैर
specific terrorist infrastructure और military सपोर्ट
नोड्स पर
repeatable, low‑signature स्ट्राइक
की क्षमता
देता है।
·
चीन
के संदर्भ
में: पर्वतीय
क्षेत्रों में
छोटे लेकिन
critical टारगेट (कमांड
पोस्ट, ammo stores, bridges, राडार
साइट्स) पर
high‑precision स्ट्राइक
की ज़रूरत
होती है;
HAMMER जैसे वेपन
high‑altitude एयरबेस
से भी
उपयोगी हैं
और मौसम/terrain‑induced
error कम करते
हैं।
·
Deterrence: indigenous
production से बड़े
स्केल पर
स्टॉक build‑up संभव
होगा, जिससे
adversary को यह
संकेत जाता
है कि
भारत limited नहीं,
sustained precision‑strike campaign भी चला
सकता है—यह
conventional deterrence को मजबूत
करता है।
संक्षेप
में, फ्रांस
की हैमर
मिसाइलों का
भारत में
निर्माण केवल
एक हथियार‑डील
नहीं, बल्कि
भारतीय वायुसेना
की दीर्घकालिक
प्रिसिजन‑स्ट्राइक
डॉक्ट्रिन, इंडिजिनस
डिफेंस इंडस्ट्री
और भारत‑फ्रांस
रणनीतिक साझेदारी—तीनों
को qualitatively ऊँचे
स्तर पर
ले जाने
वाला कदम
है
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