1. क्या ईरान F-35 को टारगेट कर सकता है?
F-35 एक Stealth (अदृश्य) फाइटर जेट है, जिसका अर्थ है कि इसे सामान्य
रडार से पकड़ना बहुत मुश्किल है। हालांकि, इसे निशाना बनाने के लिए ईरान निम्नलिखित
तकनीकों का सहारा ले सकता है:
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Passive Radar (पैसिव रडार): ये रडार खुद सिग्नल नहीं छोड़ते, बल्कि वातावरण में मौजूद अन्य रेडियो तरंगों
के प्रतिबिंब (Reflection) को पकड़ते हैं। इससे F-35 की लोकेशन का अनुमान लगाया जा सकता
है।
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Anti-Stealth Systems: ईरान के पास रूस निर्मित S-300 और स्वदेशी Bavar-373 जैसे सिस्टम
हैं। दावा किया जाता है कि ये सिस्टम कम 'रेडार क्रॉस-सेक्शन' वाले लक्ष्यों को ट्रैक
कर सकते हैं।
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निशाना कैसे बनाया जाता है: जब कोई फाइटर जेट बम गिराने के लिए अपने वेपन बे (Weapon Bay) को खोलता है,
तो उसकी 'स्टील्थ' क्षमता कम हो जाती है। उस समय रडार उसे लॉक कर सकता है। इसके अलावा,
लंबी दूरी की मिसाइलों के बजाय इंफ्रारेड सर्च एंड ट्रैक (IRST) सिस्टम का उपयोग करके
जेट के इंजन की गर्मी से उसे ट्रैक किया जा सकता है।
2. 'माजिद' एयर डिफेंस सिस्टम और F-35
Majid (AD-08) ईरान का एक शॉर्ट-रेंज, मोबाइल एयर डिफेंस सिस्टम है।
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क्षमता: यह मुख्य रूप से क्रूज मिसाइलों, ड्रोन्स और कम ऊंचाई पर उड़ने वाले विमानों
के लिए बनाया गया है।
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F-35 के खिलाफ प्रभाव: इसकी मारक क्षमता लगभग 8 से 12 किलोमीटर तक ही सीमित है। F-35 आमतौर पर बहुत
अधिक ऊंचाई से हमला करता है और लंबी दूरी की मिसाइलों (Standoff weapons) का उपयोग
करता है। इसलिए, 'माजिद' जैसे शॉर्ट-रेंज सिस्टम के लिए F-35 को पकड़ना तब तक लगभग असंभव
है जब तक कि जेट बहुत नीचे और करीब न आ जाए।
3. डिएगो गार्सिया और ईरान की मिसाइल रेंज
डिएगो गार्सिया हिंद महासागर में अमेरिका का एक महत्वपूर्ण सैन्य अड्डा है।
ईरान से इसकी दूरी लगभग 3,500 से 4,000 किलोमीटर है।
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मिसाइल क्षमता: आधिकारिक तौर पर, ईरान की सबसे लंबी दूरी की मिसाइल Khorramshahr और
Shahab-3 के उन्नत वेरिएंट्स की रेंज लगभग 2,000-2,500 किलोमीटर बताई जाती है।
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लॉन्ग रेंज अटैक: अगर ईरान ने इतनी दूरी तक हमला किया है, तो इसका मतलब है कि उन्होंने या तो
अपनी मिसाइल तकनीक में गुप्त रूप से बड़ा अपडेट किया है या उन्होंने Hypersonic
(फत्ताह-1, 2) या मल्टी-स्टेज रॉकेट तकनीक का उपयोग किया है। हालांकि, 4,000 किमी
की मारक क्षमता ईरान को 'इंटरकॉन्टिनेंटल' श्रेणी के करीब ले आती है, जो वैश्विक सुरक्षा
समीकरणों को पूरी तरह बदल देगा।
4. हिजबुल्लाह और 'टू-फ्रंट वॉर' (Two-Front War)
इजरायल के उत्तर में हिजबुल्लाह और दक्षिण में हमास/ईरान के कारण अमेरिका की
चिंताएं बढ़ी हुई हैं:
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हथियारों का भंडार: हिजबुल्लाह के पास 1,50,000 से अधिक रॉकेट और सटीक मारक क्षमता वाली मिसाइलें
हैं। यदि हिजबुल्लाह पूरी तरह युद्ध में उतरता है, तो इजरायल का 'आयरन डोम' सिस्टम
ओवरलोड हो सकता है।
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अमेरिकी चिंता: अमेरिका को डर है कि अगर इजरायल दो मोर्चों (लेबनान और गाजा/ईरान) पर फंसता
है, तो अमेरिका को सीधे युद्ध में कूदना पड़ेगा। इससे मध्य पूर्व में मौजूद अमेरिकी
बेस (Base) पर हमले बढ़ सकते हैं और वैश्विक तेल आपूर्ति ठप हो सकती है।
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रणनीतिक दबाव: हिजबुल्लाह की वजह से इजरायल को अपनी सेना का एक बड़ा हिस्सा उत्तरी सीमा पर
तैनात रखना पड़ता है, जिससे उसकी आक्रमण शक्ति बंट जाती है।
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