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Monday, 19 January 2026

चीन की चाल, भारत की चुनौती: आर्थिक मोर्चे की असली कहानी I Operation Sind...

अमेरिका-चीन तनाव से भारत को होने वाले आर्थिक लाभ

अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते व्यापारिक और राजनीतिक तनाव (Trade War) ने भारत के लिए अवसरों के नए द्वार खोल दिए हैं:

  • China Plus One (चीन प्लस वनरणनीति: दुनिया की बड़ी कंपनियां (जैसे Apple, Samsung, Google) अब अपनी मैन्युफैक्चरिंग के लिए केवल चीन पर निर्भर नहीं रहना चाहतीं। वे भारत को एक विश्वसनीय विकल्प के रूप में देख रही हैंजिससे भारत में FDI (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) बढ़ा है।
  • निर्यात में वृद्धि: अमेरिका ने कई चीनी उत्पादों पर भारी टैरिफ (Custom Duty) लगा दिया है। इसका फायदा भारतीय निर्यातकों को मिल रहा हैविशेषकर टेक्सटाइलरसायनोंइंजीनियरिंग सामान और इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में।
  • तकनीकी हस्तांतरण: चीन से हाथ खींचने के बाद कई अमेरिकी और यूरोपीय कंपनियां भारत में अपनी आरएंडडी (R&D) यूनिट्स लगा रही हैंजिससे भारत में नई तकनीकों का आगमन हो रहा है।

7. मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन में भारत की वैश्विक स्थिति

भारत वर्तमान में खुद को एक वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित कर रहा है:

  • विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था की ओर: भारत वर्तमान में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऑटोमोबाइल बाजार और दवाओं (Generics) का सबसे बड़ा निर्यातक है।
  • PLI स्कीम का असर: मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग में भारत ने लंबी छलांग लगाई है। आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल उत्पादक देश बन चुका है।
  • सप्लाई चेन रेजिलिएंस: भारत अब केवल कच्चा माल नहींबल्कि तैयार माल (Finished Goods) निर्यात करने पर ध्यान दे रहा है। हालांकिहाई-टेक सेमीकंडक्टर और जटिल मशीनरी के लिए हम अब भी अन्य देशों पर निर्भर हैंजिसे सुधारने के लिए 'Make in India 3.0' पर काम चल रहा है।

8. क्या आर्थिक युद्ध सबसे खतरनाक युद्ध है?

जी हांआधुनिक युग में आर्थिक युद्ध को 'बिना बंदूक के लड़ा जाने वाला' सबसे खतरनाक युद्ध माना जाता हैक्योंकि:

  • अदृश्य हमला: इसमें कोई सीमा पार नहीं की जातीलेकिन एक देश की अर्थव्यवस्था को अंदर से खोखला कर दिया जाता है (जैसे मुद्रा की वैल्यू गिराना या स्टॉक मार्केट को अस्थिर करना)
  • दीर्घकालिक प्रभाव: पारंपरिक युद्ध कुछ दिनों में समाप्त हो सकता हैलेकिन आर्थिक प्रतिबंध या कर्ज का जाल (Debt Trap) किसी देश की पीढ़ियों को गुलाम बना सकता है।
  • जनजीवन पर असर: आवश्यक वस्तुओं (ईंधनदवाबिजलीकी सप्लाई रोककर पूरे देश में बिना एक भी गोली चलाए हाहाकार मचाया जा सकता है।

9. क्या भारत आर्थिक युद्ध में चीन का सामना कर रहा है?

भारत अब चीन की आर्थिक चालों का उत्तर 'सक्रिय और रणनीतिक' तरीके से दे रहा है:

  • चीनी ऐप्स पर प्रतिबंध: सुरक्षा कारणों से टिकटॉक जैसे सैकड़ों चीनी ऐप्स को बैन करना चीन के डिजिटल विस्तार पर एक बड़ा प्रहार था।
  • FDI नियमों में बदलाव: भारत ने अपने पड़ोसी देशों (मुख्यतः चीनसे आने वाले निवेश के लिए सरकारी अनुमति अनिवार्य कर दी हैताकि चीनी कंपनियां भारतीय स्टार्टअप्स को धोखे से  खरीद सकें।
  • आत्मनिर्भर भारत: चीन पर निर्भरता कम करने के लिए भारत ने API (दवाओं का कच्चा माल) और सेमीकंडक्टर के घरेलू उत्पादन पर अरबों डॉलर का निवेश शुरू किया है।
  • रणनीतिक बंदरगाह: चीन के 'स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्सके जवाब में भारत चाबहार (ईरान) और दुकम (ओमान) जैसे रणनीतिक बंदरगाहों के जरिए अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है।

 

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