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Wednesday, 14 January 2026

ईरान के मुताबिक विरोध प्रदर्शन में शामिल होकर आतंकियों ने कत्लेआम किया...आईएसआईएस स्टाइल में लोगों को मारा...

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2. क्या ईरान में जो रहा है...उसके पीछे आतंकी साजिश है। क्या आईएसआईएस जैसी सोच वाले गुट प्रदर्शन को हिंसक बना रहे हैं...

3. क्या ईरान..आतंकी साजिश का पैंतरा रचकर मामले को नया मोड़ दे रहा है...

ईरान की स्थिति पर अभी जो तस्वीर बन रही है, उसमें हक़ीक़त और प्रोपेगंडा दोनों घुले हुए हैं, इसलिए तीनों सवालों के जवाब तो पूरी तरह हां, पूरी तरह नावाले हैंतर्क और उपलब्ध तथ्य दोनों देखना ज़रूरी है। नीचे बिंदुवार उत्तर:


1. “आईएसआईएस स्टाइल कत्लेआमवाली बात में कितना दम?

  • ईरानी नेताओं और सुरक्षा अधिकारियों ने हाल के दिनों में बयान दिया है कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने या उनके बीच घुसेआतंकी तत्वोंने लोगों को जलाया, सुरक्षा बलों पर फायरिंग की और हमलेआईएसआईएस जैसी शैलीमें किए हैं।
  • अभी तक स्वतंत्र, विश्वसनीय अंतरराष्ट्रीय स्रोतों के पास इन घटनाओं के पूरे प्रमाण (वीडियो की स्वतंत्र जांच, फॉरेंसिक आदि) नहीं आए हैं; लेकिन यह ज़रूर है कि कई शहरों में हिंसा, आगज़नी, सुरक्षा वाहनों और सरकारी इमारतों पर हमले हुए हैं और सुरक्षा बलों तथा कुछ प्रदर्शनकारियों की मौतें भी हुई हैं।

मतलबहिंसा और हथियारों का उपयोग हुआ है, यह तो स्पष्ट है; परसंगठित आईएसआईएस टाइप नरसंहारजैसा चित्र अभी तक खुले, स्वतंत्र सबूतों से पुष्ट नहीं हुआ, ज़्यादातर यह ईरानी हुकूमत की भाषा और नैरेटिव के रूप में दिख रहा है।


2. क्या हिंसक माहौल के पीछे आतंकी साज़िश और आईएसआईएस जैसी सोच वाले गुट हैं?

  • ईरान के विदेश मंत्री और अन्य अधिकारी लगातार कह रहे हैं कि विदेशी ताकतें, “आतंकी नेटवर्कऔर हथियारबंद गुट प्रदर्शन में घुसकर आम लोगों और सुरक्षा बलों दोनों पर फायरिंग कर रहे हैं, जिससे हालात और खूनखराबा बढ़े, और बाहरी दख़ल को जायज़ ठहराया जा सके।
  • दूसरी तरफ, स्वतंत्र रिपोर्टों में यह दिख रहा है कि मूल कारण गहरे आर्थिक संकट, महंगाई, भ्रष्टाचार के आरोप, और राजनीतिक असंतोष हैं; यानी विरोध की जड़ें घरेलू हैं, जबकि हिंसा के कुछ हिस्सों में संगठित हथियारबंद गुटों की भूमिका हो सकती है या हो सकती है कि हुकूमत इसे बढ़ाचढ़ाकर दिखा रही होअभी निश्चित निष्कर्ष पर पहुँचना मुश्किल है।

संक्षेप में

  • आतंकी साज़िशपूरी तरह मनगढ़ंत कहना भी जल्दबाज़ी होगी,
  • और पूरी विरोध लहर कोआतंकियों की कारस्तानीबताना भी वास्तविक जनआक्रोश को नज़रअंदाज़ करना होगा।

3. 3. क्या ईरान..आतंकी साजिश का पैंतरा रचकर मामले को नया मोड़ दे रहा है...

 क्या ईरानआतंकी साज़िशका कार्ड खेलकर मामला मोड़ रहा है?

  • ईरानी हुकूमत की बयानबाज़ी का पैटर्न ऐसा है कि वह प्रदर्शनकारियों को अक्सरदंगेबाज़, विदेशी एजेंट, आतंकवादीकहती है, ताकि सख़्त दमन, इंटरनेट ब्लैकआउट और भारी बल प्रयोग को वैध ठहराया जा सके। मौजूदा दौर में भीटेररिस्ट वॉर”, “आईएसआईएस स्टाइलजैसे शब्द बारीबारी से इस्तेमाल हो रहे हैं।
  • मानवाधिकार समूहों और स्वतंत्र मीडिया की रिपोर्टों में भारी गोलीबारी, सैकड़ों मौतें, अस्पतालों पर छापे, इंटरनेट बंदी आदि की बात रही हैयानीआतंकी खतरावाला नैरेटिव हुकूमत के लिए एक तरह का राजनीतिक और मनोवैज्ञानिक हथियार भी है, जिससे घरेलू विरोध को डेलीजीटिमाइज़ किया जा सके और अंतरराष्ट्रीय आलोचना कोसिक्योरिटी फाइटके नाम पर धुंधला किया जा सके।

इसलिए, बहुत संभव है कि:

  • कुछ हथियारबंद/उग्र तत्व सचमुच हिंसा कर रहे हों,
  • लेकिन राज्य इन घटनाओं का उपयोग पूरे आंदोलन कोटेरर वॉरघोषित करने और अपने दमन को जायज़ ठहराने के लिए भी कर रहा हो।

सार

  1. हिंसा, गोलीबारी और कुछ संगठित हथियारबंद गतिविधियाँ ज़रूर दिख रही हैं, परपूरी तरह आईएसआईएसस्टाइल आतंकी कत्लेआमवाला चित्र अभी एकतरफा सरकारी नैरेटिव ज़्यादा है, स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य कम।
  2. विरोध की जड़ें आर्थिकराजनीतिक असंतोष में हैं; आतंकी/हिंसक गुटों की संभावित घुसपैठ को पूरी कहानी मानना भी ग़लत होगा, और उसे पूरी तरह नकारना भी।
  3. आतंकी साज़िशका कार्ड ईरान की सत्ता के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक पैंतरा भी है, जिससे अंतरराष्ट्रीय दबाव और घरेलू आलोचना, दोनों को सिक्योरिटी नैरेटिव में ढालकर मोड़ने की कोशिश हो रही है।

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