वर्ष 2026 वैश्विक राजनीति और
विशेष रूप से यूरोपीय सुरक्षा के
लिए एक निर्णायक
मोड़ साबित हो
सकता है। रूस-यूक्रेन युद्ध, जो
2022 में शुरू हुआ
था, अब अपने चौथे वर्ष
में प्रवेश कर
रहा है। वर्तमान
भू-राजनीतिक परिस्थितियां,
सैन्य रणनीति और
पुतिन के कड़े रुख इस
बात की ओर इशारा कर
रहे हैं कि
2026 केवल यूक्रेन ही नहीं,
बल्कि पूरे यूरोप
के लिए संकट
का वर्ष हो सकता है।
निम्नलिखित विश्लेषण इन महत्वपूर्ण
विषयों पर आधारित
है:
1. 2026 में
रूस बनाम यूरोप: क्या
महायुद्ध की आहट है?
रूस और यूरोप
के बीच तनाव
अब केवल बयानों
तक सीमित नहीं
रहा है। सैन्य
विशेषज्ञों का मानना
है कि 2026 में
रूस अपनी 'हाइब्रिड
वॉरफेयर' (छद्म युद्ध)
की रणनीति को
तेज कर सकता है।
- सैन्य लामबंदी: पुतिन ने हाल
ही में अपनी
सेना के विस्तार और
मिसाइल परीक्षणों (जैसे 'ओरेश्निक' मिसाइल)
के जरिए यूरोप
को स्पष्ट संकेत
दिया है। रूस ने
अपनी अर्थव्यवस्था को 'वॉर इकोनॉमी'
में बदल दिया है,
जहां जीडीपी का एक
बड़ा हिस्सा सैन्य उत्पादन
में जा रहा है।
- नाटो की चिंताएं: पोलैंड, लातविया और
एस्टोनिया जैसे नाटो देश
अपनी सीमाओं पर रूसी
गतिविधि बढ़ने की आशंका
जता रहे हैं। यदि
रूस यूक्रेन में बड़ी
सफलता हासिल करता है,
तो अगला संभावित
लक्ष्य मोल्दोवा या बाल्टिक
देश हो सकते हैं।
- ऊर्जा और साइबर युद्ध: रूस द्वारा यूरोपीय
ऊर्जा ग्रिड पर दबाव
और साइबर हमलों
के माध्यम से
यूरोपीय देशों की आंतरिक
स्थिरता को बिगाड़ने की
योजना 2026 में अपने चरम
पर हो सकती
है।
2. पुतिन
के आवास पर हमला:
युद्ध की नई और
आक्रामक योजना
हाल ही में
रूस ने दावा किया कि
यूक्रेन ने राष्ट्रपति
पुतिन के 'वाल्डाई'
(Valdai) स्थित आवास पर
ड्रोन हमला करने
की कोशिश की।
हालांकि यूक्रेन ने
इन आरोपों को
शांति वार्ता को
बाधित करने की रूसी चाल
बताया है, लेकिन
पुतिन ने इसे आधार बनाकर
अपनी युद्ध योजना
को और अधिक आक्रामक कर दिया है:
- बफर जोन का विस्तार: रूस के टॉप
जनरल गेरासिमोव के अनुसार, पुतिन
ने 2026 तक यूक्रेन के
सूमी (Sumy) और खार्किव (Kharkiv) क्षेत्रों
में एक विशाल 'बफर
जोन' बनाने का आदेश
दिया है। इसका उद्देश्य
रूसी सीमावर्ती शहरों को यूक्रेनी
हमलों से बचाना है।
- प्रतिशोध की रणनीति: पुतिन ने इस
कथित हमले के सबूतों
को आधार बनाकर
रूसी जनता को युद्ध
के लिए और
अधिक लामबंद (Mobilize) करना शुरू कर
दिया है। रूसी रक्षा
मंत्रालय अब यूक्रेन के
ऊर्जा बुनियादी ढांचे और
सैन्य कमांड सेंटरों पर
'अंतिम प्रहार' की तैयारी
कर रहा है।
- परमाणु धमकी: रूस ने अपनी
परमाणु नीति (Nuclear Doctrine) में बदलाव कर
यह स्पष्ट कर
दिया है कि यदि
उसके अस्तित्व या नेतृत्व
पर खतरा मंडराता
है, तो वह कड़ा
जवाब देगा।
3. क्या
2026 में यूक्रेन पर रूस की
जीत तय है?
इस प्रश्न का
उत्तर "जीत" की परिभाषा
पर निर्भर करता
है। वर्तमान स्थिति
का विश्लेषण करें
तो पलड़ा रूस
की ओर झुकता
दिख रहा है, लेकिन यूक्रेन
का प्रतिरोध भी
कमजोर नहीं है।
- रूस का 'मिशन 2026': कुछ खुफिया रिपोर्ट्स
के अनुसार, पुतिन
ने दिसंबर 2026 तक
आधे यूक्रेन (विशेषकर डोनबास और
ब्लैक सी कोस्ट) पर
पूर्ण नियंत्रण का लक्ष्य
रखा है। यदि रूस
ओडेसा (Odesa) पर कब्जा कर
लेता है, तो यूक्रेन
एक 'लैंडलॉक्ड' देश बनकर रह
जाएगा, जो उसकी आर्थिक
हार होगी।
- संसाधनों की कमी: यूक्रेन वर्तमान
में हथियारों और सैनिकों
की भारी कमी
से जूझ रहा
है। हालांकि अमेरिका और
यूरोपीय संघ से वित्तीय
मदद मिल रही है,
लेकिन युद्ध के मैदान
पर रूस की
'संख्यात्मक बढ़त' (Massive Manpower) यूक्रेन के लिए
चुनौती बनी हुई है।
- निर्णायक मोड़: विशेषज्ञ मानते हैं
कि 2026 में दोनों पक्ष
अपनी पूरी ताकत झोंक
देंगे। यदि पश्चिमी देशों
की सहायता में
कमी आती है, तो
यूक्रेन को रूस की
शर्तों पर समझौता करने
या आत्मसमर्पण करने
के लिए मजबूर
होना पड़ सकता है।
हालांकि, पूरी तरह से
"राज" करना रूस के
लिए भी कठिन होगा
क्योंकि यूक्रेनी छापामार युद्ध
(Guerrilla Warfare) रूस को लंबे समय
तक लहूलुहान कर
सकता है।
निष्कर्ष:
2026 का भविष्य
वर्ष 2026 शांति की
ओर जाने वाला
साल होगा या विनाश की
ओर, यह आने वाले कुछ
महीनों की कूटनीति
पर निर्भर करता
है। पुतिन के
कड़े तेवर और यूरोप की
जवाबी तैयारी इस
बात का संकेत
है कि दुनिया
एक बड़े संघर्ष
के मुहाने पर
खड़ी है। रूस की जीत
की संभावना उसकी
सैन्य क्षमता और
पश्चिमी देशों की
एकजुटता पर टिकी है। यदि
रूस अपनी योजना
में सफल रहता
है, तो द्वितीय
विश्व युद्ध के
बाद यूरोप के
नक्शे में यह सबसे बड़ा
बदलाव होगा।
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