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Wednesday, 27 May 2026

स्वातंत्र्यवीर सावरकर राष्ट्रीय स्मारक शौर्य पुरस्कार 2026 मेजर शंतनू घाटपांडे,5/9 GURKHA RIFLES -SENA MEDAL SHAURYA- यांना भारत नाट्य मंदिर पुणे येथे 30 मे 2026 ला सकाळी नऊ वाजता सगळ्यांनी यावे


 सबसे पहले, मैं स्वातंत्र्यवीर सावरकर राष्ट्रीय स्मारक का हृदय से आभार व्यक्त करती हूँ कि उन्होंने मेरे पति, मेजर शंतनु घाटपांडे (5/9 गोरखा राइफल्स), सेना मेडल (वीरता), को “स्वातंत्र्यवीर सावरकर शौर्य पुरस्कार – 2026” के योग्य माना।

स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर जी के नाम से जुड़ा यह सम्मान प्राप्त होना हमारे लिए विशेष गौरव की बात है। सावरकर जी ने राष्ट्रप्रेम, शौर्य, कर्तव्य और राष्ट्रीय एकता को जीवन में सर्वोच्च स्थान दिया। उनकी दूरदृष्टि, देशभक्ति और मातृभूमि के प्रति समर्पण आज भी देश की अनेक पीढ़ियों को प्रेरणा देता है।

स्वातंत्र्यवीर सावरकर राष्ट्रीय स्मारक द्वारा प्रतिवर्ष राष्ट्रसेवा, शौर्य और कर्तव्यनिष्ठा के लिए भारतीय सैनिकों को सम्मानित किया जाता है। ऐसे प्रतिष्ठित सम्मान से उनका नाम जुड़ना हमारे परिवार के लिए अत्यंत सम्मान और गर्व का विषय है।

उनकी तैनाती मणिपुर के एक अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र में कॉलम कमांडर के रूप में थी। अक्टूबर 2023 में वहाँ के कुछ गाँवों पर भारी हथियारों से लैस उग्रवादियों द्वारा हमला किया गया। स्थिति अत्यंत गंभीर थी और निर्दोष नागरिकों का जीवन खतरे में था।

4 अक्टूबर 2023 को उग्रवादियों ने एक गाँव पर अंधाधुंध गोलीबारी करते हुए हमला किया। ऐसे समय में उन्होंने और उनकी टीम ने अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा की परवाह किए बिना तुरंत घटनास्थल की ओर प्रस्थान किया। भीषण गोलीबारी और तनावपूर्ण परिस्थितियों के बीच गाँव में प्रवेश कर प्रभावी जवाबी कार्रवाई की, जिससे उग्रवादियों को पीछे हटने पर मजबूर होना पड़ा। इसके बाद ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों तक पहुँचाया गया।

इसके कुछ दिनों बाद, 7 अक्टूबर 2023 को उग्रवादियों ने गाँव को जलाने के उद्देश्य से फिर से हमला किया। उस समय भी उन्होंने अद्वितीय साहस और नेतृत्व का परिचय देते हुए अपनी टुकड़ी का नेतृत्व किया तथा स्थिति को नियंत्रण में लाया।

इन अभियानों के दौरान 200 से अधिक लोगों के प्राण बचाए जा सके और अनेक परिवार सुरक्षित रहे।

इसके अतिरिक्त, उनके नेतृत्व में महत्वपूर्ण अभियान चलाए गए, जिनमें उग्रवादियों द्वारा छिपाकर रखे गए भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद किए गए। इससे आगे होने वाली हिंसा को रोकने में महत्वपूर्ण सहायता मिली।

उनके उत्कृष्ट साहस, वीरता और नेतृत्व के लिए उन्हें स्वतंत्रता दिवस 2024 के अवसर पर “सेना मेडल (वीरता)” से सम्मानित किया गया।

मेरे लिए सबसे भावुक करने वाली बात यह है कि उन्होंने कभी भी इन अभियानों की कठिन परिस्थितियों या अपने ऊपर मंडरा रहे खतरे के बारे में घर पर विस्तार से चर्चा नहीं की। भारतीय सेना के अधिकांश सैनिकों की तरह उन्होंने भी इसे केवल अपना कर्तव्य माना। हमें उनके कार्य की वास्तविक गंभीरता और वीरता का एहसास तब हुआ, जब उन्हें यह वीरता पुरस्कार प्रदान किए जाने की घोषणा हुई।

एक सैनिक के जीवन में कर्तव्य सदैव सर्वोच्च होता है। परिस्थितियाँ कितनी भी कठिन क्यों न हों, उसका उद्देश्य केवल देश और देशवासियों की रक्षा करना होता है।

आज प्राप्त यह सम्मान केवल एक पदक नहीं है, बल्कि भारतीय सेना के मूल्यों — शौर्य, अनुशासन, समर्पण और निःस्वार्थ सेवा — का सम्मान है। यह सम्मान केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि उन सभी सैनिकों और उनके परिवारों का भी है, जो शांतिपूर्वक और निस्वार्थ भाव से राष्ट्रसेवा में लगे रहते हैं।

आज इस मंच पर खड़े होकर स्वातंत्र्यवीर सावरकर जी के विचारों का स्मरण करना अपने आप में सौभाग्य की बात है। उनके नाम से जुड़ा यह सम्मान हमारे परिवार के लिए केवल गर्व का विषय नहीं, बल्कि एक प्रेरणा भी है, जो हमें आगे भी अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों के प्रति समर्पित रहने की शक्ति देती रहेगी।

अंत में, मैं केवल इतना कहना चाहूँगी —

एक सैनिक के लिए राष्ट्रसेवा केवल उसका कर्तव्य नहीं, बल्कि उसका संकल्प होता है।

वह हर परिस्थिति में, हर चुनौती के बीच, अपने देश और देशवासियों की रक्षा को सर्वोच्च मानता है।

आज प्राप्त यह सम्मान हम सभी के for लिए गर्व का क्षण है, लेकिन इसके साथ यह हमें और अधिक जिम्मेदारी, समर्पण और राष्ट्रप्रेम के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा भी देता है।

मैं पुनः स्वातंत्र्यवीर सावरकर राष्ट्रीय स्मारक का हृदय से आभार व्यक्त करती हूँ कि उन्होंने उनके कार्य, वीरता और नेतृत्व को इस प्रतिष्ठित सम्मान के योग्य माना तथा इस सम्मान से सम्मानित किया।

जय हिंद।

वंदे मातरम्।

https://www.youtube.com/watch?v=pa7gT7P1eh4


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